सबसे पहले
बुझे चिरागो को रोशनी करने से पहले,
टूटे हुए दिल के जख्म भरने से पहले,
आ देख तो सहि कितना अँधेरा है यंहा,
आ देख तो सहि कितने जख्म हुए हैं मुझे।।
थिरकती, शाम में भी वो बात न रही,
जो करती थी नशा मोहब्बत तुम्हारी मुझे,
लेकर चले जाते तुम सारे सपने तुम्हारे,
कब तक संजोता फिरूँ उन्हें रोज-रोज मैं।।
आ कर एक नजर देख तो लेते हमें,
साँस थोड़ी ही तो बाकी रेह गई मुझमें ,
गुनाह किया होता तो सजा भी कुबूल थी,
इस पाक से रिश्ते को पल भर में क्युँ तोड़ गए यूँ।।
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