Thursday, 25 December 2014

Haa Hai!!!

             हाँ है 

सुनी आँखों में पानी भरने से पहले
हवाओं का रुख बदलने से पहले
         आ गए होते तुम
     और बस कह देते हाँ है;

      पर तेरा वो रूखापन;
    बदले-बदले से मिजाज
      बातों में कसमसाहट
      झकझोरती रही मुझे। 

 फिर भी आँखे जागी रातों को,
       आराम गया दिल का,
      और पहुँच गया ये मन
       उस जगह जहाँ पर 
  न तो पानी होता था पीने को 
और न प्यास होती थी बुझाने को,

         पर न जाने क्यूँ ,
    न तो तूने अपने लब  खोले 
और न हि  खोला मुंदी आँखों को
  बेचेंन  हो गए पल छीन सारे मेरे
     बस इतना सुनने को की
                हाँ हैं 
  
हाँ है हवाले तेरे अब तो ये साँसे
  हाँ है हमें तुम्हारे साथ रहना;
        हाँ है, हाँ है, हाँ है 
सिर्फ तुम्हारे वास्ते मेरी हाँ है!!!

                  -   राजकुमार 








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